विश्वविद्यालय के कार्य को सुव्यवस्थित रूप से संचालित करने के लिए कुछ निकाय हैं। ये हैं - विश्वविद्यालय कोर्ट, कार्य परिषद्, विद्या परिषद् और वित्त समिति जैसी सांविधिक समितियाँ।
विश्वविद्यालय कोर्ट :
जे.एन.यू. कोर्ट विश्वविद्यालय का सर्वोच्च निकाय है। सामान्यत: इसकी बैठक प्रत्येक वर्ष में एक बार होती है, जिसमें विश्वविद्यालय की वार्षिक रिपोर्ट, वार्षिक लेखों, लेखा-परीक्षा रिपोर्ट और बजट पर विचार किया जाता है। विश्वविद्यालय कोर्ट को कार्य परिषद् और विद्या परिषद् के कार्यों की समीक्षा करने का अधिकार उन परिस्थितियों में है, यदि इन परिषदों ने विश्वविद्यालय संबंधी संसद् के अधिनियम, संविधियों और अध्यादेशों के अन्तर्गत इन्हें प्रदत्त शक्तियों से हटकर कोई कार्य किया हो।
कार्य परिषद् :
कार्य परिषद् विश्वविद्यालय की एक उच्चतम और महत्त्वपूर्ण कार्य निकाय है, जो विश्वविद्यालय के सामान्य प्रबन्धन और प्रशासन की देख-रेख करती है।
विद्वत परिषद् :
विद्या परिषद् विश्वविद्यालय की मुख्य शैक्षिक निकाय है। विद्या परिषद् को अन्य के साथ-साथ कुछ महत्त्वपूर्ण शक्तियाँ भी प्राप्त हैं - जैसे उच्च शिक्षा के विभागों, महाविद्यालयों, संस्थानों की स्थापना करना या उन्हें मान्यता प्रदान करना, शोध गतिविधियों का प्रसार करना, अन्य संस्थानों के डिप्लोमा और उपाधियों को मान्यता प्रदान करना और जे.एन.यू. के डिप्लोमा और उपाधियों के साथ इनकी समतुल्यता निर्धारित करना, विश्वविद्यालय में प्रवेश से संबंधित विभिन्न समितियों का गठन करना और निर्धारित नियमों के अनुसार छात्रों के लिए अध्ययन और परीक्षाओं के आयोजन संबंधी प्रबन्ध करना है। इस परिषद् की कुछ संस्तुतियाँ अनुमोदन हेतु कार्यपरिषद् को भेजी जाती हैं।
वित्त समिति :
वित्त समिति विश्वविद्यालय की सांविधिक निकाय है। यह समिति एक वर्ष के लिए विश्वविद्यालय के बजट तथा व्यय प्रस्तावों, नए/अतिरिक्त पदों से संबंधित सभी प्रस्तावों, लेखों, लेखा-परीक्षा रिपोर्ट और अन्य वित्तीय एवं लेखाओं से संबंधित मामलों पर विचार करती है। इसकी संस्तुतियाँ कार्य परिषद् को अनुमोदित करने के लिए भेजी जाती हैं।